कन्या, तुला, वृश्चिक, सिंह, मिथुन एवं कुम्भ ये छः राशियाँ शीर्षोदय होती हैं। अर्थात्, पूर्वीय क्षितिज पर उदय के समय इनका सिर वाला भाग प्रथम दृष्टिगोचर होता है।
मकर, वृषभ, धनु, कर्क और मेष ये पाँच राशियाँ पृष्ठोदय होती हैं। अर्थात्, पूर्वीय क्षितिज पर उदय के समय इनका पृष्ठभाग पहले उदित होता है। मीन राशि उभयोदय है। मीन राशि का स्वरुप दो मछलियों वाला है। ये दोनों मछलियाँ एक-दूसरे से विपरीत दिशा में अपना मुख रखे हुए हैं। इसीलिए, उदय के समय एक साथ सिर एवं पूंछ दिखने से इसे उभयोदय अर्थात् सिर एवं पूंछ से एक साथ उदित होने वाली कहा जाता है।
शीर्षोदय राशियाँ मूलतः शुभ और पृष्ठोदय राशियाँ सामान्यतः अशुभ होती हैं। मीन राशि सदैव मिश्रित या मध्यम फलद होती है। इसके अतिरिक्त, पृष्ठोदय राशियाँ उत्तरार्द्ध में और शीर्षोदय राशियाँ पूर्वार्ध में विशेष फलप्रद हैं। उभयोदय राशि मध्य में फलप्रद होती है। अर्थात्, पृष्ठोदय राशिस्थ ग्रह सम्पूर्ण दशा के अंत में, शीर्षोदय स्थित ग्रह आदि में तथा उभयोदय मध्य में फलद होते हैं। प्रश्न विचार में, शीर्षोदय कार्यसाधक और पृष्ठोदय कार्यनाशक है। प्रस्तुतकर्ता : गोपाल
3 टिप्पणियां:
किंतु.."सप्तमेश अगर शीर्शेदय राश्यान्तर्गत हे तो शैय्या सुख नहीं मिलता। -महर्षि भृगु"
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अत: इस मामले में तो शीर्शेदय राशि अशुभ हुई??
Bilkul sahi bat hai mahrshi bhragu ji ki
In rashi me pareshan lagan ka ka mahtav h ,jaise shishudaya late natiza, shirsh shighar
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